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यात्रा ….. उत्तरा खंड : : यात्रा का आरंभ
जीवन बिताने को उम्र कहते है और जीवन जीने को जिंदगी कहते हैं. जिस प्रकार एक पंछी जो लंबे समय से पिंजरे में कैद हो , और अचानक एक सुबह उसे लगे कि अरे ! इस पिंजरे का दरवाजा तो खुला हुआ है ! तो….समझिए कुछ ऐसा ही मुझे प्रतीत हुआ जब…
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यात्रा …… उत्तरा खंड : : बर्फ से लदे हिमालय से भेंट
गहरी नींद में अगर आपको कोई झकझोर के उठाए तो आप जानते ही होंगे कि उठने वाला उस समय क्या फील कार्य होगा ,कुछ ऐसा ही हम सब ने फील किया जब हमारे मेजबान , होम स्टे के मालिक ने हमे उठाया ।हम कुछ बोलते कि उसने कहा “” सर…
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यात्रा ……..चित्रकूट धाम (अंतिम : भाग )
अगले दिन हम जल्दी ही उठे ,सीधे नदी में स्नान किया और सीधे चित्रकूट में स्थित सबसे महत्वपूर्ण ,शायद भगवान राम के प्रवास काल का साक्षी ,”” कामदगिरि “” पर्वत की परिक्रमा के लिए चल पड़े। इस पर्वत की परिक्रमा का पूरे हिंदू धर्म में उतना ही महत्व है जितना मथुरा में…
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यात्रा ………..चित्रकूट धाम (भाग : चार)
अगली सुबह जब हम उठे तो हमारी थकान एक दम गायब हो चुकी थी।कमरे की खिड़की से बाहर झांका तो हम आश्चर्य चकित रह गए ।सामने मंडाकानी नदी ,नदी के सामने वाले किनारों पर स्नार्थियों की भीड़,सब तरह की चहल पहल ,मंदिरों में पूजा पाठ ,घंटियों के हल्के हल्के स्वर ,हमारे आश्रम…
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यात्रा ………..चित्रकूट धाम (भाग : तीन)
ओरछा से बाहर गुगल बाबा के दिखाए मार्ग पर चित्रकूट जाने हेतु ,लगभग दस किलोमीटर के बाद एक हाइवे दिखाई दिया।सामने लगे बड़े से एक बोर्ड ने गुगल के दिखाए मार्ग की पुष्टि कर दी ,एवम बोर्ड पर लगे निर्देश के अनुसार हम उस हाइवे पर चढ़ गए और चलपड़े सीधे छतरपुर…
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यात्रा …………..चित्रकूट धाम ( भाग ::दो)
ओरछा की दूरी जब बारह किलो मीटर ही रह गई तब मुख्य मार्ग से एक अलग मार्ग आ गाया ।सड़क हालांकि छोटी थी परंतु उसके दोनों और थोड़ी थोड़ी दूर पर बड़े ही शानदार होटल बने हुए थे जो ये जताने को काफी थे कि ओरछा एक बड़ा तीर्थ स्थल ही…
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यात्रा ……….चित्रकूट धाम।(भाग …एक)
कोरोना की दूसरी लहर का खात्मा, ,वेक्सिन का कोर्स भी पूरा ,गर्मी का भी खात्मा ,तो …..फिर क्या था ,मन का पंछी बरसात की फुहारों में भीगने को ,उड़ने को व्याकुल हो उठा ,परंतु वही पिंजरे का दरवाजा अभी भी बंद था।कहते हैं ना कि जहां चाह ,वहां राह ! जैसे ही…
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यात्रा …..रामानुजाचार्य ( भाग : दो )तेलंगाना .
अंदर प्रवेश करते ही लगा ,जैसे हम इस समय हैदराबाद में नही ,बल्कि धुर दक्षिण भारत के किसी आश्रम में खड़े हैं ।सबसे पहले हमारी नजर गई ,,आकाश को चूमती ,विशाल घेरे वाली ,पीले रंग की एक ध्यान मग्न सन्यासी की मूर्ति पर ,जो अपने कंधे पर ध्वज दंड रखे ,दोनो हाथों…
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यात्रा …….रामनुजाचार्य जी आश्रम ( भाग : एक ) तेलंगाना
नांदेड़ से चली मेरी ट्रेन ठीक सुबह पांच बजे सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन पर पहुंची ।इस समय , मैं ,कल की भागदौड़ और रात के” ऐसी” डिब्बे की शांति में ,गहरी नींद में डूबा हुआ था ।वो तो स्टेशन पर उतरने वाले यात्रियों के शोर से मेरी आंख खुली ,स्टेशन देख मैं…
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यात्रा ………हुजूर साहिब गुरुद्वारा: नांदेड़ ( महाराष्ट्र )
मेरे घुम्मकड़ स्वभाव ने मुझे ,अन्य स्थानों के अतिरिक्त ऐतिहासिक स्थानों तथा धार्मिक स्थानों पर भी जाने के लिए मजबूर किया है।इसी स्वभाव के चलते , मैं ,पाकिस्तान स्थित ,गुरु नानक जी के निर्वाण स्थान : करतार पुर ,गुरु गोविंद सिंह जी के जन्म स्थान ,पटना ,गुरु तेगबहादुर जी के निर्वाण स्थल ,शीश…