अतुल्य भारत की कहानिया..!!
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विशेष रुप से प्रदर्शित
स्वयं परिचय….
मुझे घूमने का शौक….., नहीं नहीं घूमने का रोग तो बचपन से था,खूब घूमा भी,मगर इस घूमने के शौक में पंख और लग गए जब स्टेट बैंक में अधिकारी नियुक्त हुआ। मैने लगभग सारे हिंदुस्तान की यात्रा की है ।इस के लिए जो भी उपलब्ध साधन जैसे कि ट्रेन,बस,ट्रक और पैदल ,से अपना शौक पूरा… और पढ़े
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यात्रा…. औंधा नगनाथ (महाराष्ट्र)
सुबह 11 बजे से महाराष्ट्र सरकार की बस से लगातार चलते हुए ,लगभग दोपहर के 3 बजे के करीब जब हम औंधा नाग नाथ पहुंचने ही वाले थे कि एक ढाबे पर बस रूकी। कंडकतर महोदय ने उच्च स्वर में घोषणा की कि 15 मिनट के विराम में आप भोजन आदि कर सकते हैं ।बस… और पढ़े
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यात्रा …..परली बैजनाथ : ज्योतिर्लिंग
जैसे कि मैने पहले बताया था , मैं पुणे बेटे के पास आया हुआ था , कि मेरे छोटे भ्राता श्री नरेंद्र का फोन आया , कि आप चूंकि पुणे में है ,तो क्यों ना राखी के अवसर पर हैदराबाद निवासी हमारी छोटी बहन के पास जा कर ,उसके साथ क्यों ना रखी के त्योहार … और पढ़े
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